रुद्रप्रयाग /केदारनाथ, 31 अक्टूबर। बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान के केदारनाथ दर्शन को लेकर नया धार्मिक विवाद खड़ा हो गया है। 25 अक्टूबर 2026 को सारा अली खान ने केदारनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की थी, जिसकी तस्वीरें और वीडियो उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर शेयर किए थे।
मौलाना का फतवा – बताया हराम
इस दौरे पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बरेली के मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कड़ी आपत्ति जताई है। मौलाना ने सारा के मंदिर में पूजा करने को इस्लामिक शरिया के खिलाफ बताते हुए इसे ‘नाजायज और हराम’ और ‘शिर्क’ करार दिया है। उन्होंने अभिनेत्री से अल्लाह से माफी मांगने (तौबा करने) की अपील की है।
BKTC का Affidavit नियम
वहीं दूसरी ओर बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के नियमों को लेकर भी चर्चा तेज है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंदिर में प्रवेश से पहले सारा अली खान की टीम ने नियमानुसार गैर-हिंदू शपथ पत्र (Non-Hindu Affidavit) जमा किया था। BKTC के नियमों के तहत गैर-हिंदू श्रद्धालुओं को दर्शन से पहले यह शपथ पत्र देना होता है।
सारा अली खान इससे पहले भी केदारनाथ आ चुकी हैं। केदारनाथ के प्रति उनकी आस्था जगजाहिर है, लेकिन हर बार उनके दौरे पर इसी तरह का विवाद खड़ा हो जाता है।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का बयान
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि आज अखबार में एक चिंताजनक खबर पढ़ी। अभिनेत्री सारा अली खान श्रद्धापूर्वक केदारनाथ गई हैं। वह नवाब पटौदी और शर्मिला टैगोर जी की पोती और सैफ अली खान की बेटी हैं, उनकी अपनी आस्था है। वह अपने पिता से मिले धर्म का भी पालन करती हैं और साथ ही केदारनाथ के प्रति भी श्रद्धा रखती हैं।
लेकिन कुछ कूपमंडूक लोग उनके जाने पर फतवा जारी कर रहे हैं। यह कट्टरपंथिता हमारे समाज और देश को कहां ले जाएगी, इस पर सोचना होगा।
धर्मपरायण होना अलग बात है और कट्टर होना अलग बात है। आप मुलायम रहकर भी धर्मपरायण हो सकते हैं। अपने धर्म का पालन कीजिए, अपने धर्म के गुणों का प्रचार कीजिए, लेकिन किसी की आस्था को रोकने का आपको क्या हक है?

मैं जानता हूं इस्लाम में मूर्ति पूजा नहीं होती, लेकिन आस्था और मूर्ति पूजा में फर्क है। हो सकता है वह वहां जाकर ध्यान लगाकर अल्लाह को ही याद कर रही हों। क्योंकि दुनिया की सभी भूमि नारायण की है, सभी भूमि अल्लाह की है।
कट्टरपंथिता से देश पहले से ही दुखी है। ऐसे लोग हिंदू और मुसलमान दोनों में हैं, जो सिर्फ खुद को चर्चा में लाने के लिए समाज को दंश देते हैं। ये न हिंदू के हितैषी हैं, न मुसलमान के और न ही अपने धर्म के हितैषी हैं।

