घनसाली के बौंर गांव में सर्वे करने आई महिला अफसर का फिसला पांव, ग्रामीण चारपाई से ले गए अस्पताल, टिहरी झील में फैले कचरे से बढ़ी बौंर गांव में मुश्किलें


घनसाली (टिहरी गढ़वाल)। टिहरी बांध प्रभावित ग्राम बौंर, भिलंगना ब्लॉक की हकीकत सिस्टम पर बड़ा सवाल है। जिस गांव में कभी 200-250 वोटर रहते थे, आज वहां सिर्फ 53 वोटर बचे हैं। गांव न रास्तों से जुड़ा है, न सुविधाओं से।

और इस बदहाली की पोल उस वक्त खुल गई, जब THDC और पुनर्वास विभाग की टीम खुद सर्वे के लिए गांव पहुंची। जर्जर, कीचड़ भरे रास्ते पर टीम की एक महिला कर्मचारी का पांव फिसल गया और वह गंभीर रूप से घायल हो गई। आलम ये था कि ग्रामीणों को उसे कपड़े की चारपाई बनाकर कंधों पर उठाकर सड़क तक लाना पड़ा। सोचिए, जब अधिकारी ही इन रास्तों पर नहीं चल पा रहे, तो बुजुर्ग और बच्चे कैसे चलते होंगे?

हादसे में घायल महिला अधिकारी को अस्पताल ले जाते ग्रामीण

गांव की 4 बड़ी समस्याएं जो प्रशासन नहीं देख रहा –

1. रास्ते और नहर पूरी तरह जर्जर: गांव के सभी पैदल और संपर्क मार्ग टूट चुके हैं। सिंचाई विभाग की नहर सालों से क्षतिग्रस्त है, जिससे खेती चौपट है।

2. पुनर्वास के 3 सर्वे, रिपोर्ट गायब: ग्रामीणों का आरोप है कि पुनर्वास विभाग ने अब तक 3 बार सर्वे किया है, लेकिन एक भी रिपोर्ट का आज तक पता नहीं है। पुनर्वास न तो कागज पर मिला, न जमीन पर।

3. कोटेश्वर महादेव मंदिर हजारों टन कूड़े में कैद: टिहरी झील के कारण हर साल मानसून में कोटेश्वर महादेव मंदिर परिसर में हजारों टन कूड़ा, लकड़ी, झाड़ियां और रेत जमा हो जाता है। पूरे गांव में दुर्गंध और संक्रामक बीमारियों का खतरा रहता है। ग्रामीण कई बार SDM घनसाली, DM टिहरी और विधायक घनसाली को सूचित कर चुके हैं, लेकिन सफाई नहीं होती। आखिर में ग्रामीणों को ही चंदा करके सफाई करनी पड़ती है। आखिर इसकी जिम्मेदारी THDC की है या प्रशासन की?

टिहरी झील में गांव के सामने झील में जमा हुआ कचरा

4. जंगली जानवरों का आतंक: फसलों को जंगली जानवर लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं और अब जानवर आबादी तक आने लगे हैं। कभी भी बड़ी जनहानि हो सकती है।

ग्रामीणों का कहना है कि टिहरी बांध प्रभावितों के लिए योजनाएं और पलायन रोकने के दावे सिर्फ कागजों और भाषणों तक हैं। धरातल पर ग्राम बौंर के लिए कुछ नहीं हुआ। गांव सुविधाओं के अभाव में खाली होता जा रहा है।

ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि बौंर गांव का स्थायी समाधान किया जाए, अन्यथा ग्रामीण DM कार्यालय पर आंदोलन को मजबूर होंगे।


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