देहरादून/केदारनाथ: श्री केदारनाथ धाम में पुजारी नियुक्ति को लेकर विवाद तूल पकड़ गया है। केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकरलिंग ने बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) द्वारा जारी नवीनतम नियुक्ति आदेश को धार्मिक परंपराओं का उल्लंघन करार दिया है। उन्होंने बीकेटीसी के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और टिहरी नरेश को पत्र लिखकर परंपरा की रक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत बीकेटीसी के उस आदेश से हुई जिसमें ईश्वरलिंग को श्री केदारनाथ अधिष्ठान में रिक्त चल रहे पुजारी पद पर अस्थायी रूप से नियुक्त किया गया है।
रावल भीमाशंकरलिंग का आरोप है कि वर्ष 2023 से रिक्त इस पद पर परंपरा के अनुसार प्रशिक्षित चेला शान्तलिंग की नियुक्ति की जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि केदारनाथ धाम में सदियों से चली आ रही मान्यता के तहत रावल की संस्तुति के बिना पुजारी की नियुक्ति नहीं की जा सकती। बिना संस्तुति के की गई यह नियुक्ति न केवल परंपराओं का, बल्कि रावल के पारंपरिक अधिकारों का भी सीधा उल्लंघन है।
तीन दिन का अल्टीमेटम, अनशन की चेतावनी
रावल एवं वैराग्यपीठ ने बीकेटीसी को तीन दिन का अल्टीमेटम देते हुए विवादित नियुक्ति आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की है।
चेतावनी दी गई है कि यदि तय समयसीमा में मांग पूरी नहीं की गई तो ऊखीमठ स्थित वैराग्यपीठ (उषा मठ) में आमरण अनशन शुरू कर दिया जाएगा। इससे धाम में धार्मिक और प्रशासनिक संकट गहराने की आशंका है।
फिलहाल बीकेटीसी की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
